vyāmiśreṇeva vākyena buddhiṃ mohayasīva me |tadekaṃ vada niścitya yena śreyo'hamāpnuyām ||
उलझे हुए-से इन वचनों से आप मानो मेरी बुद्धि को भ्रम में डाल रहे हैं। इसलिए निश्चय करके मुझे वह एक बात बताइए, जिससे मैं परम कल्याण पा सकूँ।
व्याख्या
अर्जुन उलझन में है। कृष्ण ने ज्ञान और कर्म दोनों की बात की है, और अर्जुन को लगता है कि ये बातें मिली-जुली हैं और वह तय नहीं कर पा रहा कि कौन-सा मार्ग अपनाए। इसलिए वह एक निश्चित उत्तर माँगता है जो उसे श्रेयस् यानी परम कल्याण तक पहुँचाए, केवल क्षणिक लाभ तक नहीं।