अपने सारे कर्म मुझे समर्पित करके, चित्त को आत्मा में लगाए हुए, कामना और ममता से रहित और संताप से मुक्त होकर युद्ध करो।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को अपनी सीख का सार बताते हैं: कर्म करो, पर हर कर्म मुझे अर्पित करो और मन को आत्मा (अध्यात्म) में स्थिर रखो। फल की आशा और ममता छोड़ने से मन का संताप (ज्वर) मिट जाता है, और अर्जुन अपना कर्तव्य समझकर लड़ सकता है। "मुझमें" का अर्थ कुछ परंपराएँ व्यक्तिगत ईश्वर कृष्ण लेती हैं, तो कुछ सब प्राणियों में स्थित परम आत्मा।