यह कामना है, यह क्रोध है, जो रजोगुण से उत्पन्न होता है। यह सब कुछ निगल जाने वाला और महापापी है। इसे ही यहाँ शत्रु जानो।
व्याख्या
अर्जुन ने पिछले श्लोक में पूछा था कि मनुष्य न चाहते हुए भी मानो किसी बल से प्रेरित होकर पाप क्यों करता है। उसका उत्तर देते हुए कृष्ण कहते हैं कि इसका कारण कामना (काम) है, जो बाधा पड़ने पर क्रोध का रूप ले लेती है। यह रजोगुण से, यानी प्रकृति के बेचैन और कर्मोन्मुख गुण से, उत्पन्न होती है, कभी तृप्त नहीं होती और बड़े अनर्थ कराती है। इसलिए इसे इस जीवन में अपना शत्रु समझना चाहिए।