हे महाबाहो! इस प्रकार जो बुद्धि से भी परे है उसे जानकर, अपने आप को अपने ही द्वारा स्थिर करके, कामना के रूप में रहने वाले इस दुर्जेय शत्रु को मार डालो।
व्याख्या
अध्याय के अंत में कृष्ण अर्जुन को अपनी शिक्षा का व्यावहारिक निष्कर्ष देते हैं। इन्द्रियों, मन और बुद्धि के क्रम के बाद वे बताते हैं कि आत्मा इन सबसे परे है। इसे जानकर अर्जुन को अपने निचले स्वरूप को ऊँचे आत्म-बोध से स्थिर करके कामना (काम) रूपी दुर्जेय शत्रु को जीतना है। कुछ परंपराएँ यहाँ 'आत्मा' को व्यक्ति की अपनी उच्च चेतना मानती हैं, कुछ परम आत्मा, पर दोनों इसे संयम का साधन मानती हैं।