धूमेनाव्रियते वह्निर्यथाऽऽदर्शो मलेन च ।यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम् ॥
dhūmenāvriyate vahniryathā''darśo malena ca |yatholbenāvṛto garbhastathā tenedamāvṛtam ||
जैसे आग धुएँ से ढकी रहती है, दर्पण धूल से ढका रहता है, और गर्भस्थ शिशु झिल्ली से ढका रहता है, वैसे ही यह (ज्ञान) उस (काम) से ढका हुआ है।
व्याख्या
कृष्ण ने अभी काम को शत्रु बताया है, जो रजोगुण (चंचलता और आसक्ति के गुण) से उत्पन्न होता है। यहाँ वे तीन उपमाएँ देते हैं: धुआँ आग को, धूल दर्पण को और झिल्ली गर्भ को ढकती है। अगले श्लोक में स्पष्ट होता है कि 'यह' ज्ञान है, जिसे काम ढक लेता है; टीकाकार प्रायः इन तीन उपमाओं को ढकने की हल्की से गहरी होती मात्राएँ मानते हैं।