योगी तपस्वियों से श्रेष्ठ है, ज्ञानियों से भी श्रेष्ठ माना गया है, और कर्मकांड करने वालों से भी योगी श्रेष्ठ है। इसलिए हे अर्जुन, तुम योगी बनो।
व्याख्या
ध्यान-साधना और योगी के प्रयास के फल की चर्चा समाप्त करते हुए कृष्ण यहाँ अर्जुन को योगी की श्रेष्ठता समझाते हैं। वे योगी (साधना के द्वारा परमात्मा से निरंतर जुड़े साधक) को तपस्वियों (तपस्विन्), ज्ञानियों (ज्ञानिन्) और कर्मकांडियों (कर्मिन्) से श्रेष्ठ बताते हैं। 'ज्ञानी' का अर्थ कुछ परंपराएँ शास्त्र के विद्वान लेती हैं, तो कुछ आत्मज्ञानी। किसी भी अर्थ में, अंत में कृष्ण अर्जुन से सीधे कहते हैं कि तुम योगी बनो।