जो मुनि योग पर आरूढ़ होना चाहता है, उसके लिए कर्म साधन कहा गया है; और वही जब योग में आरूढ़ हो जाता है, तब उसके लिए शम (शांति) साधन कहा जाता है।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं कि योग (आध्यात्मिक साधना) में आगे बढ़ना कई चरणों में होता है। शुरुआत करने वाले के लिए निष्काम कर्म मन को तैयार करने का साधन है; जो योग में स्थिर हो चुका है, उसके लिए शम (भीतरी शांति) स्थिर रहने का साधन बनता है। टीकाकार इसे अलग ढंग से पढ़ते हैं: कुछ शम को कर्मों से निवृत्ति मानते हैं, तो कुछ कर्म करते हुए भी भीतर की शांति।