कर्म क्या है और अकर्म क्या है — इस विषय में तो विवेकी जन भी भ्रमित हो जाते हैं। इसलिए मैं तुम्हें वह कर्म समझाऊँगा, जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो जाओगे।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को कर्म का स्वरूप समझा रहे हैं, ताकि वह कर्म से हटने के बजाय सही ढंग से कर्म करे। वे कहते हैं कि कर्म और अकर्म क्या हैं, यह समझने में ज्ञानी (कवयः) भी उलझ जाते हैं। वे इसे स्पष्ट करने का वचन देते हैं, जिससे अर्जुन "अशुभ" से मुक्त हो सके; सामान्यतः इसका अर्थ जन्म-मरण का बंधन और दुःख माना जाता है।