बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन ।तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥
bahūni me vyatītāni janmāni tava cārjuna |tānyahaṃ veda sarvāṇi na tvaṃ vettha parantapa ||
हे अर्जुन, मेरे भी बहुत से जन्म बीत चुके हैं और तुम्हारे भी। हे परन्तप, उन सबको मैं जानता हूँ, पर तुम नहीं जानते।
व्याख्या
अर्जुन ने पूछा था कि विवस्वान (सूर्य) तो बहुत पहले जन्मे थे, तो कृष्ण ने उन्हें यह योग कैसे बताया होगा। इसके उत्तर में कृष्ण कहते हैं कि दोनों के अनेक जन्म हो चुके हैं, पर उन सबकी स्मृति केवल उन्हें है, अर्जुन को नहीं। परन्तप का अर्थ है “शत्रुओं को तपाने वाला”, जो अर्जुन का संबोधन है। वैष्णव परंपराएँ इसे परमेश्वर के अवतारों की स्मृति मानती हैं, जबकि अद्वैत परंपरा इसे ईश्वर के माया से प्रकट होने के रूप में समझती है।