स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः ।भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ॥
sa evāyaṃ mayā te'dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ |bhakto'si me sakhā ceti rahasyaṃ hyetaduttamam ||
वही यह प्राचीन योग आज मैंने तुम्हें बताया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त हो और मेरे सखा भी हो। निश्चय ही यह अत्यंत उत्तम रहस्य है।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने बताया था कि यह परंपरा समय के साथ लुप्त हो गई थी; अब वे अर्जुन को बताते हैं कि वे यह योग उसे क्यों सुना रहे हैं: क्योंकि वह उनका भक्त और सखा है। यहाँ योग का अर्थ वह साधना है जो मनुष्य को परमात्मा से जोड़ती है। रहस्य का अर्थ गहरा और गोपनीय ज्ञान है, जो हर किसी को नहीं दिया जाता। इस योग को कुछ परंपराएँ मुख्यतः निष्काम कर्म का मार्ग मानती हैं और कुछ ज्ञान या भक्ति का मार्ग।