कर्म के विषय में भी समझना आवश्यक है, विकर्म के विषय में भी समझना आवश्यक है, और अकर्म के विषय में भी समझना आवश्यक है; क्योंकि कर्म की गति गहन है।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कर्म समझाने का वचन दिया, जिससे अर्जुन अशुभ से मुक्त हो सके। यहाँ वे कहते हैं कि तीन बातें समझनी चाहिए: कर्म, विकर्म (निषिद्ध या अनुचित कर्म) और अकर्म। साथ ही वे कहते हैं कि कर्म की गति गहन और सूक्ष्म है। अकर्म का अर्थ परंपराओं में भिन्न है; कहीं इसे कर्म का अभाव माना गया है, तो कहीं फल की आसक्ति के बिना किया गया कर्म।