divi sūryasahasrasya bhavedyugapadutthitā |yadi bhāḥ sadṛśī sā syādbhāsastasya mahātmanaḥ ||
यदि आकाश में एक साथ हज़ार सूर्य उदित हो जाएँ, तो उनका प्रकाश उस महात्मा के तेज के समान होता।
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को उस विश्वरूप का वर्णन सुना रहे हैं जो कृष्ण ने अर्जुन को दिखाया। उस रूप के तेज को बताने के लिए वे एक उपमा देते हैं: आकाश में एक साथ उगे हज़ार सूर्यों का प्रकाश ही उसके तेज की बराबरी कर सकता। यह उपमा बताती है कि वह तेज किसी भी सांसारिक प्रकाश से कहीं बढ़कर था। यहाँ "महात्मा" विश्वरूप धारण किए हुए कृष्ण के लिए कहा गया है।