मैं आपको आदि, मध्य और अंत से रहित, अनंत सामर्थ्य वाले, असंख्य भुजाओं वाले देखता हूँ। चन्द्रमा और सूर्य आपके नेत्र हैं, आपके मुख प्रज्वलित अग्नि जैसे हैं, और आप अपने ही तेज से इस सारे जगत को तपा रहे हैं।
व्याख्या
अर्जुन कृष्ण का विश्वरूप देखकर उसका वर्णन करता है: ऐसा स्वरूप जिसका न आदि है, न मध्य, न अंत; जिसके नेत्र सूर्य और चन्द्रमा हैं और मुख अग्नि की तरह जलते हैं। यह चित्र असीम शक्ति और पूरे ब्रह्मांड को व्याप्त कर तपाने वाली उपस्थिति को दिखाता है। यह रूप विस्मयकारी भी है और भयावह भी, जो आगे अर्जुन के बढ़ते भय की भूमिका बनाता है।