vāyuryamo'gnirvaruṇaḥ śaśāṅkaḥprajāpatistvaṃ prapitāmahaśca |namo namaste'stu sahasrakṛtvaḥpunaśca bhūyo'pi namo namaste ||
आप ही वायु हैं, यम हैं, अग्नि हैं, वरुण हैं और चन्द्रमा हैं। आप ही प्रजापति हैं और सबके प्रपितामह भी। आपको हज़ार बार नमस्कार, नमस्कार; और फिर बार-बार, आपको नमस्कार, नमस्कार।
व्याख्या
कृष्ण का विश्वरूप देखकर अभिभूत अर्जुन उन्हें सभी देवशक्तियों का मूल बताकर स्तुति करता है। वह वायु, यम (मृत्यु के देव), अग्नि, वरुण (जल के देव) और चन्द्रमा के रूप में उनका नाम लेता है, और उन्हें प्रजापति (सृष्टिकर्ता) तथा प्रपितामह कहता है, यानी पितामह ब्रह्मा के भी मूल। बार-बार नमस्कार उसके विस्मय और विनम्रता को दिखाता है।