न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा ।दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥
na tu māṃ śakyase draṣṭumanenaiva svacakṣuṣā |divyaṃ dadāmi te cakṣuḥ paśya me yogamaiśvaram ||
परंतु अपनी इन्हीं आँखों से तुम मुझे नहीं देख सकते। मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि देता हूँ; मेरे ईश्वरीय योग-सामर्थ्य को देखो।
व्याख्या
कृष्ण ने अर्जुन को अपने शरीर में पूरा जगत देखने को कहा था। यहाँ वे बताते हैं कि अर्जुन की साधारण आँखें इसे नहीं देख सकतीं, इसलिए वे उसे दिव्य चक्षु (दिव्यं चक्षुः) देते हैं। 'ऐश्वरम् योग' का अर्थ है उनकी वह ईश्वरीय शक्ति, जिससे वे सारे ब्रह्मांड को एक रूप में प्रकट करते हैं।