संजय
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी । नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ॥
etacchrutvā vacanaṃ keśavasya kṛtāñjalirvepamānaḥ kirīṭī | namaskṛtvā bhūya evāha kṛṣṇaṃ sagadgadaṃ bhītabhītaḥ praṇamya ||
केशव के इन वचनों को सुनकर मुकुटधारी अर्जुन ने काँपते हुए हाथ जोड़कर प्रणाम किया; फिर भय से अत्यंत घबराया हुआ, झुककर, रुँधे गले से वह दोबारा कृष्ण से बोला।
व्याख्या संजय धृतराष्ट्र को बता रहे हैं कि विश्वरूप देखने और कृष्ण का युद्ध-आदेश सुनने के बाद अर्जुन की क्या दशा हुई। किरीटी (मुकुटधारी) अर्जुन विस्मय और भय से काँप रहा है, हाथ जोड़कर बार-बार प्रणाम करता है। उसकी स्तुति अगले श्लोक में आती है।
पिछला श्लोक 11.34 अध्याय 11 · विश्वरूप दर्शन अगला श्लोक 11.36
भगवद्गीता के बारे में
भगवद्गीता, संस्कृत में श्रीमद्भगवद्गीता (Śrīmad Bhagavad Gītā ), अर्थात् “भगवान का गीत”, महाभारत के भीष्म पर्व का एक संवाद है, जिसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में, युद्ध आरंभ होने से ठीक पहले, अपने ही स्वजनों से लड़ने के विचार से अर्जुन का मन टूट जाता है, और उसके सारथी श्रीकृष्ण उसे उत्तर देते हैं: कर्तव्य पर, फल की आसक्ति के बिना कर्म करने पर, ज्ञान, ध्यान और भक्ति पर। संजय यह संवाद नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं। इसे भगवद् गीता, भगवत गीता, श्रीमद् भगवद् गीता या श्रीमद्भगवद्गीता भी लिखा जाता है, और प्रायः केवल गीता कहा जाता है।
यहाँ हर श्लोक मूल संस्कृत में है, रोमन लिप्यन्तरण, सरल भाषा में अनुवाद और एक संक्षिप्त व्याख्या के साथ — हिन्दी, अंग्रेज़ी, अरबी, स्पेनिश, फ़्रेंच और तमिल में। अनुवाद इस साइट के लिए सीधे संस्कृत से किए गए और जाँचे गए हैं; वे किसी प्रकाशित अनुवाद पर आधारित नहीं हैं। पढ़ना निःशुल्क है, बिना खाते और बिना विज्ञापन के, और आपकी प्रगति आपके ब्राउज़र में रहती है। श्लोक 1.1 से 18.78 तक गिने गए हैं, कुल 701, जिनमें अध्याय 13 के आरंभ का प्रश्न भी शामिल है।
भाषाएँ: English · हिन्दी · العربية · Español · Français · தமிழ்