जैसे पतंगे पूरे वेग से जलती हुई आग में नष्ट होने के लिए घुसते हैं, वैसे ही ये लोग भी पूरे वेग से अपने विनाश के लिए आपके मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।
व्याख्या
अर्जुन श्रीकृष्ण द्वारा दिखाए गए भयानक विश्वरूप का वर्णन कर रहा है। पिछले श्लोक में योद्धाओं की तुलना समुद्र की ओर बहती नदियों से की गई थी। यहाँ उन्हें आग में गिरते पतंगों जैसा बताया गया है, जिससे दिखता है कि वे कितनी तेज़ी से और बिना समझे अपने अंत की ओर खिंचे जा रहे हैं। यह उपमा विनाश और काल की ऐसी शक्ति दिखाती है जिसे कोई रोक नहीं सकता।