आप अपने धधकते मुखों से सब ओर से समस्त लोकों को निगलते हुए बार-बार चाट रहे हैं। हे विष्णु, आपकी उग्र किरणें अपने तेज से समस्त जगत को भरकर उसे झुलसा रही हैं।
व्याख्या
अर्जुन कृष्ण के दिखाए विश्वरूप से काँप उठा है और बता रहा है कि वह रूप अपने ज्वलित मुखों में सब प्राणियों को निगल रहा है। जो तेज पूरे जगत में व्याप्त है, वही उसे तपा भी रहा है; इससे काल और संहार ईश्वर के ही पहलू दिखते हैं। वह कृष्ण को विष्णु, यानी सर्वव्यापी, कहकर पुकारता है, और अगले श्लोक में पूछता है कि यह उग्र रूप वाला कौन है।