मैं आपको पहले की तरह ही देखना चाहता हूँ — मुकुट धारण किए, गदा लिए, हाथ में चक्र लिए हुए। हे सहस्रबाहु, हे विश्वमूर्ति! आप उसी चार भुजाओं वाले रूप में प्रकट हो जाइए।
व्याख्या
अर्जुन विश्वरूप के भयावह दर्शन से घबरा गया है और कृष्ण से परिचित रूप में लौटने की प्रार्थना करता है। मुकुट, गदा और चक्र उस चतुर्भुज रूप के चिह्न हैं जिसे परंपरा विष्णु से जोड़ती है। वह कृष्ण को 'सहस्रबाहु' और 'विश्वमूर्ति' कहकर पुकारता है, क्योंकि अभी वही रूप उसके सामने है। कृष्ण 11.50 में यह प्रार्थना स्वीकार करते हैं, जिसे बहुत से लोग पहले चतुर्भुज रूप और फिर सौम्य मानव रूप दिखाने के अर्थ में लेते हैं।