अर्जुन से इस प्रकार कहकर वासुदेव ने फिर अपना निज रूप दिखाया। तब उन महात्मा ने पुनः सौम्य शरीर धारण करके भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया।
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि अर्जुन को भय न करने के लिए कहने के बाद कृष्ण ने क्या किया। वासुदेव (वसुदेव के पुत्र कृष्ण) ने अपना निज रूप फिर दिखाया और सौम्य शरीर धारण करके भयभीत अर्जुन को शांत किया। "स्वकं रूपम्" का अर्थ परंपराओं में अलग है: कुछ इसे उनका द्विभुज मानव रूप मानते हैं, तो कुछ पहले दिखाया गया चतुर्भुज रूप, जिसके बाद सौम्य द्विभुज रूप आया।