evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥ |darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram ||
हे राजन्, ऐसा कहकर महायोगेश्वर हरि ने तब पृथापुत्र अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया।
व्याख्या
संजय राजा धृतराष्ट्र को यह दृश्य सुना रहे हैं। अर्जुन को दिव्य दृष्टि देने के बाद कृष्ण, जिन्हें यहाँ हरि और महायोगेश्वर (योग की दिव्य शक्ति के स्वामी) कहा गया है, उसे अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाते हैं। उस रूप का वर्णन अगले श्लोक में आगे चलता है।