मैं आपको मुकुट, गदा और चक्र धारण किए हुए देखता हूँ। आप तेज के पुंज हैं, जो चारों ओर प्रकाशित हो रहा है। प्रज्वलित अग्नि और सूर्य के समान दीप्ति से चारों ओर जगमगाते हुए आप कठिनाई से देखे जा सकते हैं, और आप अपरिमेय हैं।
व्याख्या
अर्जुन उस विश्वरूप का वर्णन कर रहे हैं जो कृष्ण ने उन्हें दिखाया है। उन्हें मुकुट, गदा और चक्र जैसे विष्णु के परिचित चिह्न दिखते हैं, पर वे चकाचौंध करने वाले तेज में घिरे हैं। "अप्रमेय" का अर्थ है कि यह रूप मन और इंद्रियों की पकड़ से पूरी तरह परे है।