इसलिए तुम उठो और यश प्राप्त करो। शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य का भोग करो। ये सब तो पहले ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं; हे सव्यसाची, तुम केवल निमित्त बन जाओ।
व्याख्या
कृष्ण अपना विश्वरूप दिखाकर स्वयं को काल बता चुके हैं, जो लोकों का संहार करता है। यहाँ वे निष्कर्ष देते हैं कि अर्जुन संकोच छोड़कर युद्ध करे, क्योंकि परिणाम पहले से तय है और अर्जुन केवल निमित्त है। "सव्यसाची" अर्जुन का नाम है, यानी दोनों हाथों से बाण चलाने वाला। परंपराएँ इसे अलग ढंग से पढ़ती हैं: कुछ ईश्वर की इच्छा के प्रति समर्पण पर बल देती हैं, तो कुछ यह कि अर्जुन को अपने धर्म के अनुसार कर्म करना ही है।