एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर ।द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥
evametadyathāttha tvamātmānaṃ parameśvara |draṣṭumicchāmi te rūpamaiśvaraṃ puruṣottama ||
हे परमेश्वर, आपने अपने बारे में जैसा कहा है, वह वैसा ही है। फिर भी हे पुरुषोत्तम, मैं आपका ऐश्वर्य से युक्त रूप देखना चाहता हूँ।
व्याख्या
अर्जुन ने अभी कृष्ण से उनकी महिमा और सब प्राणियों के उनसे उत्पन्न होने और उन्हीं में लौटने की बात सुनी है। वह कहता है कि उसे यह सब स्वीकार है, पर अब वह इसे सुनना ही नहीं, देखना भी चाहता है। इसलिए वह कृष्ण को परमेश्वर और पुरुषोत्तम कहकर उनका दिव्य, ऐश्वर्यमय रूप (ऐश्वर रूप) दिखाने की प्रार्थना करता है।