जैसे मनुष्य पुराने फटे वस्त्रों को छोड़कर दूसरे नए वस्त्र धारण कर लेता है, वैसे ही देहधारी आत्मा जीर्ण शरीरों को छोड़कर दूसरे नए शरीरों में प्रवेश करती है।
व्याख्या
अर्जुन अपने स्वजनों को मारने की सोच से शोक में डूबा है, इसलिए कृष्ण उसे समझा रहे हैं। वे शरीर बदलने की तुलना वस्त्र बदलने से करते हैं: देही (शरीर में रहने वाली आत्मा) वही रहती है, केवल शरीर बदलता है। यह श्लोक पुनर्जन्म की बात कहता है; परंपराएँ इस पर सहमत हैं, पर आत्मा के स्वरूप को लेकर उनके मत अलग हैं, यानी वह पूरी तरह ब्रह्म से एक है या उससे भिन्न।