यदि तुम मारे गए तो स्वर्ग पाओगे, और यदि जीत गए तो पृथ्वी का भोग करोगे। इसलिए हे कुन्तीपुत्र, युद्ध का पक्का निश्चय करके उठ खड़े हो।
व्याख्या
कृष्ण युद्धभूमि में हिचकिचा रहे अर्जुन से कह रहे हैं। क्षत्रिय के धर्म (कर्तव्य) की दृष्टि से वे बताते हैं कि दोनों ही परिणाम शुभ हैं: मरने पर स्वर्ग और जीतने पर पृथ्वी का राज्य। इसलिए वे अर्जुन को दृढ़ निश्चय के साथ उठकर युद्ध करने को कहते हैं। यहाँ तर्क लोक और कर्तव्य के आधार पर है; आसक्ति के बिना कर्म करने की गहरी शिक्षा अगले श्लोक में आती है।