यह आत्मा अप्रकट है, विचार की पकड़ से परे है और इसमें कोई विकार नहीं होता, ऐसा कहा गया है। इसलिए इसे ऐसा जानकर तुम्हें शोक करना उचित नहीं है।
व्याख्या
अर्जुन अपने स्वजनों के वध की आशंका से शोक में डूबा है। उसे समझाते हुए कृष्ण यहाँ आत्मा के बारे में अपनी बात समेटते हैं। आत्मा को अव्यक्त यानी इन्द्रियों के लिए अदृश्य, अचिन्त्य यानी विचार की पहुँच से परे और अविकार्य यानी कभी न बदलने वाली कहा गया है। इसी समझ के आधार पर कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि उसका शोक अनुचित है।