इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता और वायु सुखा नहीं सकती।
व्याख्या
अर्जुन के शोक को दूर करने के लिए कृष्ण पिछले श्लोक की बात आगे बढ़ाते हैं, जहाँ उन्होंने कहा था कि आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में जाती है। यहाँ वे कहते हैं कि शस्त्र, अग्नि, जल और वायु जैसी भौतिक शक्तियाँ उसे हानि नहीं पहुँचा सकतीं, क्योंकि वह भौतिक वस्तु नहीं है। आत्मा और परमात्मा के संबंध को लेकर परंपराओं में मतभेद है, पर सभी इस श्लोक को आत्मा की अविनाशिता का कथन मानती हैं।