श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला ।समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ॥
śrutivipratipannā te yadā sthāsyati niścalā |samādhāvacalā buddhistadā yogamavāpsyasi ||
अनेक बातें सुनकर उलझी हुई तुम्हारी बुद्धि जब समाधि में अडिग और स्थिर हो जाएगी, तब तुम योग को प्राप्त करोगे।
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि उसका भ्रम कैसे समाप्त होगा। "सुनी हुई बातें" (श्रुति) से प्रायः अनेक उपदेशों और कर्मकांड-विधियों का संकेत माना जाता है, जबकि कुछ टीकाकार इसे विशेषकर वेदवचनों के रूप में पढ़ते हैं। जब बुद्धि समाधि (गहन ध्यानमय एकाग्रता, आत्मा में स्थिरता) में अचल हो जाएगी, तब अर्जुन योग, यानी आंतरिक एकत्व और संतुलन, को पाएगा।