avācyavādāṃśca bahūn vadiṣyanti tavāhitāḥ |nindantastava sāmarthyaṃ tato duḥkhataraṃ nu kim ||
तुम्हारे शत्रु तुम्हारे सामर्थ्य की निंदा करते हुए बहुत-सी न कहने योग्य बातें कहेंगे। भला इससे बढ़कर दुख की बात और क्या होगी?
व्याख्या
कृष्ण अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित करते हुए बताते हैं कि पीछे हटने पर उसे कैसी अपकीर्ति सहनी पड़ेगी। शत्रु उसके बल और कौशल की निंदा करते हुए अपशब्द कहेंगे, और इससे बड़ा दुख क्या होगा? यहाँ कृष्ण योद्धा के सम्मान और कर्तव्य (धर्म) की बात करते हैं, इसके बाद वे गहरे उपदेश की ओर बढ़ते हैं।