चारों ओर जल भर जाने पर छोटे जलाशय का जितना प्रयोजन रह जाता है, तत्त्व को जानने वाले ब्राह्मण के लिए सब वेदों का उतना ही प्रयोजन रह जाता है।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा था कि वेदों का विषय तीनों गुण हैं, और अर्जुन से उनसे ऊपर उठने को कहा था। यहाँ वे उदाहरण देते हैं: जब चारों ओर जल ही जल हो, तब छोटे कुएँ या जलाशय का महत्त्व बहुत कम रह जाता है। उसी तरह जो ब्राह्मण सच में जान चुका है, उसके लिए वेदों के कर्मकांड का प्रयोजन सीमित रह जाता है। कुछ परंपराएँ इसे आत्मज्ञान द्वारा कर्मकांड से आगे जाना मानती हैं, तो कुछ इसे वेदों की पूर्णता उसी ज्ञान में मानती हैं।