हे पार्थ, जिस धृति के कारण मंदबुद्धि मनुष्य नींद, भय, शोक, विषाद और मद को नहीं छोड़ता, वह धृति तामसी है।
व्याख्या
कृष्ण धृति (दृढ़ता या संकल्प) के तीन प्रकार बता रहे हैं, जो प्रकृति के तीन गुणों से जुड़े हैं। यहाँ सबसे निचली, तामसी धृति का वर्णन है; तमस जड़ता और अज्ञान का गुण है। इसमें मंदबुद्धि व्यक्ति नींद, भय, शोक, निराशा और अभिमान से चिपका रहता है और उनसे ऊपर नहीं उठता। कुछ व्याख्याकार इसे बुरी आदतों पर अड़े रहना मानते हैं, तो कुछ इसे ऐसे धुँधले मन की दशा मानते हैं जो इनसे ऊपर उठ ही नहीं पाता।