हे अर्जुन! ईश्वर सब प्राणियों के हृदय-प्रदेश में स्थित है। वह अपनी माया से सभी प्राणियों को घुमाता रहता है, मानो वे किसी यंत्र पर सवार हों।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा कि मोह के कारण मना करने पर भी अर्जुन अपने स्वभाव से बँधकर युद्ध करेगा। यहाँ वे बताते हैं कि ईश्वर सबके हृदय में रहता है और अपनी माया से प्राणियों को ऐसे घुमाता है मानो वे किसी यंत्र पर सवार हों। अद्वैत परंपरा इसे अंतर्यामी आत्मा और माया के रूप में पढ़ती है, जबकि भक्ति परंपराएँ इसे सगुण ईश्वर द्वारा कर्मानुसार प्रेरणा मानती हैं।