उस ज्ञान को सात्त्विक जानो, जिसके द्वारा मनुष्य सभी प्राणियों में एक ही अविनाशी सत्ता को देखता है, जो बँटे हुए रूपों में भी अविभक्त है।
व्याख्या
कृष्ण यहाँ प्रकृति के तीन गुणों के अनुसार ज्ञान के तीन भेद बता रहे हैं। सात्त्विक ज्ञान (सत्त्व: स्पष्टता और संतुलन का गुण) वह है जो अलग-अलग दिखने वाले प्राणियों में एक ही अविभक्त, अविनाशी सत्ता को देखता है। अद्वैत परंपरा इसे एक ही आत्मा या ब्रह्म मानती है, जबकि भक्ति-परंपराएँ प्रायः इसे सबमें एक ही परमात्मा की उपस्थिति या एक जैसे जीवात्मा के रूप में समझती हैं।