सब धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा; शोक मत करो।
व्याख्या
श्रीकृष्ण अर्जुन से बोल रहे हैं और अपने उपदेश का समापन आश्वासन के साथ कर रहे हैं। वे कहते हैं कि केवल उनकी शरण लो, तो वे सब पापों से मुक्त कर देंगे और शोक की आवश्यकता नहीं रहेगी। "सब धर्मों को छोड़ने" का अर्थ परंपराओं में भिन्न है: अद्वैत टीकाकार इसे कर्तापन के भाव का त्याग मानते हैं, जबकि वैष्णव परंपराएँ इसे अन्य मार्गों और कर्तव्यों को छोड़कर पूर्ण समर्पण के रूप में समझती हैं।