हे भारत, पूरे भाव से तुम उसी की शरण में जाओ। उसकी कृपा से तुम परम शांति और शाश्वत धाम को प्राप्त करोगे।
व्याख्या
पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा कि ईश्वर सब प्राणियों के हृदय में रहता है। अब वे अर्जुन से कहते हैं कि पूरे भाव (सर्वभाव) से उसी की शरण लो। उसकी कृपा (प्रसाद) से परम शांति और शाश्वत स्थान मिलता है। "उसे" कौन समझा जाए, इस पर परंपराओं में भेद है: कुछ अद्वैत व्याख्याएँ उसे अंतर्यामी आत्मा या ब्रह्म मानती हैं, जबकि भक्ति परंपराएँ उसे सगुण भगवान कृष्ण मानती हैं।