जहाँ योग के स्वामी कृष्ण हैं और जहाँ धनुष धारण करने वाले पार्थ हैं, वहीं श्री, विजय, ऐश्वर्य और अटल नीति है — ऐसा मेरा मत है।
व्याख्या
संजय धृतराष्ट्र को युद्ध का वृत्तांत सुनाने के बाद अपना निष्कर्ष कहते हैं। योगेश्वर (योग के स्वामी) कृष्ण और धनुर्धर अर्जुन ज्ञान और कर्म के मेल के प्रतीक हैं। संजय का मत है कि जहाँ ये दोनों हैं, वहीं समृद्धि, विजय और सही नीति होगी। कुछ व्याख्याकार इसे युद्ध की भविष्यवाणी मानते हैं, तो कुछ जीवन के लिए सामान्य सत्य।